एक जंगल था।
उस जंगल में एक हाथी रहता था।
उसका नाम था — मोटू।
मोटू सबसे बड़ा जानवर था। जब चलता था तो ज़मीन हिलती थी। जब नदी में घुसता था तो पानी कम हो जाता था। जब किसी पेड़ के नीचे खड़ा होता था तो पूरा पेड़ छाँव में आ जाता था।
उसे अपने बड़े होने पर बहुत गर्व था।
जब वो जंगल में चलता तो सब रास्ता दे देते। बाघ हट जाते। हिरन किनारे हो जाते। बंदर पेड़ों पर चढ़ जाते। किसी ने कभी मोटू को रुकने को नहीं कहा था।
एक दोपहर मोटू जंगल के रास्ते से जा रहा था।
तभी पैर में कुछ गुदगुदी हुई।
नीचे देखा।
एक चींटी थी।

बहुत छोटी। लगभग दिखती नहीं। रास्ते के बीचोबीच खड़ी थी। एक दाना उठाए थी। और ऊपर देख रही थी।
"हटो," मोटू ने कहा। "मैं बहुत बड़ा हूँ और आ रहा हूँ।"
"मैं खाना घर ले जा रही हूँ," चींटी ने कहा। आवाज़ बहुत छोटी थी पर डरी नहीं थी। "बस एक पल।"
मोटू ने चींटी को देखा। फिर खुद को देखा। फिर चींटी को देखा।
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।
वो रुक गया।
चींटी ने अपना दाना उठाया। धीरे-धीरे रास्ते के किनारे से होते हुए घास में घुस गई।
जाते-जाते बोली — "धन्यवाद।" बिना पीछे देखे।
मोटू एक पल खड़ा रहा।
फिर चल दिया।
उसने किसी को नहीं बताया। पर उस शाम नदी पर पानी पीने गया तो थोड़ा धीरे चला। बस ध्यान रखकर — कहीं कोई कुछ घर ले जा रहा हो।
आप कितने भी बड़े हो — अपने से छोटों के साथ हमेशा प्यार से व्यवहार करना चाहिए।
शुभ रात्रि, नन्हे दोस्त।