पढ़ना सीखो ज्ञान नैतिकता 🌐 Read in English
Ek chote chuhe ke bil ka gol darwaza thodi sardi ke khet mein thoda khula hai — andar se garm amber roshni bahar thande paalon par pad rahi hai — peeche thanda pale duniya failti hai

दयालु चूहा और धोखेबाज़ साँप

एक खेत में एक चूहा रहता था।

वो दयालु था। पास आने वाली चिड़ियों के साथ खाना बाँटता था। एक बार एक भौंरा उल्टा गिर गया था — उसे सीधा किया था। बस ऐसा ही था — बिना सोचे मदद करने वाला।

एक सर्दी की सुबह उसे अपने बिल के पास एक साँप मिला।

अकड़ा हुआ। ठंड से। मुश्किल से साँस ले रहा था।

चूहे ने देर तक देखा।

वो जानता था साँप क्या करते हैं। वो मूर्ख नहीं था।

पर साँप इतना करीब था मरने के — कि चूहे का मन नहीं माना।

साँप को अंदर लाया। सूखी घास से गर्म किया। थोड़ा खाना दिया। पूरे दिन पास बैठा रहा।

शाम तक साँप ठीक हो गया।

चूहा बिल के दरवाज़े की तरफ बढ़ा।

साँप उससे तेज़ निकला।

Ek chote garm chuhe ke bil ke andar ek saanp lapet khaya hua seedha chuhe ki taraf dekh raha hai — chota chuha deewaar se lag ke khada hai — chehra hairat aur yaqeen na hone wali sthiti mein

बाहर जाने से पहले ही साँप ने चूहे को लपेट लिया।

"यह क्या?" चूहे ने कहा। "मैंने तुम्हारी जान बचाई।"

"मैं साँप हूँ," साँप ने सीधे कहा। "यही मेरी फितरत है।"

"पर मैंने तुम्हारी मदद की।"

"हाँ," साँप ने कहा। "और मैं उसके लिए आभारी भी हूँ। पर मेरी फितरत नहीं बदलती तुम्हारी दयालुता से। मुझे भूख लगी है। तुम यहाँ हो।"

तभी बाहर से एक नेवले की आवाज़ आई। साँप और चूहे की आवाज़ें सुनकर आया था।

साँप ने छोड़ा। भाग गया।

चूहा देर तक बिल में बैठा रहा।

उसके बाद वो दयालु रहा।

पर यह देखने लगा कि किस पर दया कर रहा है।

दयालुता कभी गलत नहीं होती।
पर यह ज़रूर देखो — किसके साथ कर रहे हो।
कुछ जीव अपनी फितरत नहीं बदल सकते — चाहे तुमने कितनी भी मदद की हो।

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