बचपन का दस्तावेज़

वो बचपन जो कहीं न कहीं अभी भी है

बचपन की यादें कभी नहीं भूलतीं

पंचतंत्र की कहानियों से लेकर निजी यादों तक — हर पीढ़ी के बचपन की कहानियाँ एक जगह।

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57 कहानियाँ
5 अध्याय
2 भाषाएँ
यादों के झरोखे से

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An empty afternoon street with a wooden stick and coiled rope leaning against a wall, an old cardboard box and a damroo resting nearby, and a pair of slippers left behind in the dust
बचपन डायरीज़ · 4 मिनट

मदारी: वो तमाशा

यादें
दोपहर का वक़्त था, गली में सन्नाटा सा था, बस पंखे की आवाज़ और कहीं दूर रेडियो बज रहा था। तभी एक आवाज़ आई — डम... डम... डम... कोई डमरू बजा रहा था, दूर से, पर कान वहीं खड़े हो गए। खाना खाते खाते चम्मच वहीं छोड़ दी, चप्पल भी नहीं पहनी, बस दौड़ पड़े गली की तरफ।
Manoj Rajput
Ek khali rajdarbaar mein ek taraf mitti ke gamle mein ek chota aam ka paudha hai aur doosri taraf ek khula peetal ka sandook hai jisme alag alag saize ke paanch aam ke paudhe dikhte hain — beech mein zameen par resham ka kapda bika pada hai
पढ़ना सीखो · 2 मिनट

तेनालीराम और जादूगर

ज्ञान
तेनालीराम और जादूगर दक्षिण भारत की एक मशहूर लोककथा है — राजा कृष्णदेवराय के दरबार के सबसे चतुर कवि तेनालीराम के बारे में। तेनालीराम हमेशा वो देखते थे जो बाकी सब नहीं देख पाते थे।
Manoj Rajput
Raat mein ek jungle ke talaab mein poora chaand shaant kaale paani mein bilkul saaf dikhta hai jabki kinaron ki geeli mitti mein bade haathi ke pair ke gehre nishaana hain — peeche andhera jungle failta hai
पढ़ना सीखो · 2 मिनट

खरगोश और तालाब का चाँद

ज्ञान
खरगोश और कुएँ का चाँद पंचतंत्र की एक चतुर कहानी है — जो यह बताती है कि जब ताकत न हो तो दिमाग से काम लो। दो हज़ार साल पुरानी इस कहानी में एक छोटा खरगोश एक बड़े हाथी के झुंड को सिर्फ अपनी समझदारी से रोक देता है।
Manoj Rajput
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