पढ़ना सीखो

ऊँट और सियार

2 मिनट
Read in English →

ऊँट और सियार पंचतंत्र की एक कहानी है — जो यह बताती है कि जो दूसरों के साथ करते हो वो अपने साथ भी होता है। दो हज़ार साल पुरानी यह कहानी धोखे और उसके नतीजे के बारे में है।

एक नदी के किनारे एक ऊँट रहता था।

नदी के उस पार गन्ने का बड़ा खेत था। ऊँट रोज़ देखता — हरा, भरा, पर पहुँच से बाहर। नदी गहरी थी। अकेले पार नहीं हो सकता था।

एक दिन एक सियार आया।

"मुझे उस खेत के बारे में पता है," सियार बोला। "उस तरफ खरबूज़े भी हैं — खेत से थोड़ा आगे। मैं जाना चाहता हूँ पर तैर नहीं सकता। तुम तैर सकते हो। मुझे पार करा दो — दोनों खाएँगे।"

ऊँट मान गया। सियार पीठ पर बैठा। दोनों पार हो गए।

उस तरफ ऊँट गन्ने के खेत में घुस गया। आराम से खाने लगा। सियार को खरबूज़े मिले — छोटे थे, कम थे। जल्दी खत्म हो गए।

ऊँट अभी खा ही रहा था कि सियार ने हुआँ-हुआँ शुरू कर दिया।

लंबी आवाज़। ज़ोर से।

"क्या कर रहे हो?" ऊँट ने कहा। "किसान सुन लेंगे।"

"खाने के बाद मेरी आदत है," सियार बोला। "रोक नहीं सकता।"

किसान सुन गए। डंडे लेकर आए। ऊँट को खूब मारा। खेत से भगाया।

सियार घास में छुप गया था।

किसान गए। ऊँट चोटिल खड़ा था। सियार घास से निकला — बिल्कुल बेफिक्र।

"वापस चलें?" सियार ने हँसते हुए कहा। पीठ पर बैठ गया।

नदी में घुसे।

सबसे गहरे हिस्से में ऊँट रुक गया।

"क्या हुआ?" सियार ने पूछा।

"गहरे पानी में लोटने की मेरी आदत है," ऊँट बोला। "खाने के बाद। रोक नहीं सकता।"

सियार कुछ बोलता उससे पहले ऊँट लुढ़क गया।

Ek bada oont nadi ke gehre hisse mein bilkul shaanti se lot raha hai jabki uski peeth par se ek siyar ghabhrahat mein ud raha hai — haath hilate hue muh khula hua hairaan

सियार पानी में गया। किसी तरह तैरकर किनारे आया — बमुश्किल।

ऊँट बाकी रास्ता शांति से पार कर गया।

दूसरों के साथ जैसा करते हो — वैसा ही अपने साथ होता है।
सियार यह भूल गया। ऊँट नहीं भूला।

Manoj Rajput

Manoj Rajput

टिप्पणियाँ