नन्हे सितारे
ज्ञान साहस
A large mango tree with an empty windswept nest in its branches and a tiny feather floating in the air below it while the warm afternoon sky stretches wide and open behind

वो चिड़िया जो उड़ नहीं पाती थी

1 मिनट
Read in English →

एक आम के पेड़ पर एक घोंसला था।

उस घोंसले में एक छोटी चिड़िया रहती थी।

उसका नाम था — चिरु।

चिरु के सभी भाई-बहन उड़ना सीख गए थे। एक-एक करके घोंसले के किनारे आए। एक पल रुके। और कूद गए। पंख खुले। आसमान मिल गया। देखने में आसान लगता था।

चिरु घोंसले के किनारे बैठती। नीचे देखती।

बहुत दूर था नीचे।

वापस बीच में चली जाती।

रोज़ सुबह माँ खाना लेकर आती।

"आज?" माँ पूछती।

"कल," चिरु कहती।

माँ कुछ नहीं बोलती। खाना रखती। चली जाती।

यह कई दिन चला।

एक दोपहर आसमान में बादल आए। हवा चलने लगी। धीरे-धीरे तेज़ होती गई।

आम का पेड़ हिला। डालियाँ हिलीं। पत्ते हिले।

चिरु घोंसले के किनारे थी। हवा और तेज़ हुई। उसने पकड़ने की कोशिश की — पर घोंसले का किनारा हाथ से छूट गया।

वो गिरी।

नीचे। तेज़ी से।

और फिर — बिना सोचे, बिना तय किए, बिना किसी से पूछे — पंख खुल गए।

A tiny sparrow flies through the air between two trees for the first time — wings spread wide and slightly wobbly with a surprised joyful expression while her mother watches calmly from a branch behind

वो उड़ी।

सीधी नहीं। टेढ़ी-मेढ़ी। एक तरफ झुकी। दूसरी तरफ। तीन पेड़ आगे एक झाड़ी में उतरी। धम्म।

पर उतरी उड़ते हुए। गिरते नहीं।

एक पल वहीं बैठी रही। साँस ली।

फिर आसमान की तरफ देखा।

बहुत बड़ा था। घोंसले से जितना दिखता था उससे कहीं ज़्यादा बड़ा।

वापस उड़ी। थोड़ा बेहतर। थोड़ा सीधी। आम के पेड़ तक पहुँची।

माँ एक डाल पर बैठी थी। देख रही थी।

"कल," माँ ने मुस्कुराते हुए कहा।

"आज," चिरु ने कहा।

कभी-कभी हम तब तक नहीं कूदते जब तक कोई धक्का न दे।

पर यह ठीक है।

क्योंकि एक बार उड़ जाओ — तो याद हमेशा रहता है कि उड़ सकते हैं।

शुभ रात्रि, नन्हे दोस्त।

Manoj Rajput

Manoj Rajput

टिप्पणियाँ