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A small rabbit stands calmly at the edge of a deep stone well in a lush forest, birds and deer watching from the trees behind

मूर्ख शेर और चालाक खरगोश

एक जंगल था जहाँ सब डरते थे।

वजह एक शेर था। क्रूर नहीं — बस लालची। हर रोज़ शिकार करता था। भूख हो तो भी, न हो तो भी। जंगल खाली होने लगा था। जानवर गायब होने लगे थे।

सब जानवरों ने मिलकर सोचा। फिर शेर के पास गए।

"हम रोज़ एक जानवर तुम्हारे पास भेजेंगे," सबसे बूढ़े हिरन ने कहा। "तुम्हें शिकार नहीं करना पड़ेगा। और हम जी सकेंगे।"

शेर मान गया।

कई महीने यही चलता रहा। रोज़ एक जानवर जाता। बकरी। हिरन। जंगली सूअर। शेर खाता और सोता।

फिर वो दिन आया जब खरगोश की बारी थी।

खरगोश छोटा था। पर समझदार था। और मरने को तैयार नहीं था।

वो बहुत धीरे-धीरे चला। घंटों देर से पहुँचा।

शेर गुस्से में था। "देर से आए। और इतने छोटे हो। यह अपमान है।"

"हुज़ूर," खरगोश ने शांति से कहा, "माफ करें। रास्ते में एक और शेर मिला। कहने लगा यह जंगल उसका है। मैंने कहा — यह नहीं हो सकता, असली राजा तो आप हैं। वो हँसा।"

शेर दहाड़ा। "दूसरा शेर? कहाँ है?"

खरगोश उसे जंगल के किनारे एक गहरे कुएँ के पास ले गया। "वो वहाँ रहता है।"

A furious lion leans over a deep stone well while a small calm rabbit watches safely from behind in a forest clearing

शेर ने नीचे झाँका। एक शेर उसे देख रहा था — वैसा ही गुस्से वाला चेहरा।

शेर ने दहाड़ लगाई। उसका अक्स भी दहाड़ा।

शेर कूद गया।

खरगोश धीरे-धीरे घर की तरफ चल दिया। कान हिलाते हुए।

पीछे से जंगल में — धीरे-धीरे — आवाज़ें वापस आने लगीं। 

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