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बीरबल और भिखारी

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एक जाड़े की सुबह, बादशाह अकबर ने दरबार में ऐलान किया।

"मुझे बताया गया है," उन्होंने कहा, "कि कोई इंसान यमुना के ठंडे पानी में रात भर खड़ा रह सकता है। मुझे यकीन नहीं। जो भी यह करेगा — उसे सौ सोने के सिक्के मिलेंगे।"

दरबार हँसा। कौन इतना पागल होगा।

पर महल के बाहर एक गरीब आदमी ने यह सुना। उसकी बीवी बीमार थी। बच्चे भूखे थे। घर की छत नहीं थी। उसे पैसों की ज़रूरत थी।

उस रात वो यमुना में कमर तक उतर गया। पानी इतना ठंडा था कि हड्डियाँ दर्द करने लगीं। दाँत बजने लगे। पैरों का एहसास जाता रहा।

पर वो खड़ा रहा।

रात भर उसने दूर महल की एक खिड़की में जलता हुआ दीया देखा। उसी पर नज़र टिकाए रखा। जब तक दीया दिखता है, उसने सोचा, मैं अकेला नहीं हूँ।

सुबह होते-होते वो कर चुका था।

काँपते हुए, नीले होंठों के साथ — पर ज़िंदा — दरबार में आया। अकबर हैरान थे। "कैसे बचे?" उन्होंने पूछा।

आदमी ने महल की खिड़की के दीये की बात बताई।

अकबर का चेहरा बदल गया। "तुमने धोखा किया। दीये की गर्मी ली। इनाम नहीं मिलेगा।"

आदमी खाली हाथ घर चला गया।

बीरबल उस दिन चुप रहे।

पर अगली सुबह जब दरबार लगा — बीरबल नहीं आए। अकबर ने आदमी भेजा। वो लौटा और बोला — "हुज़ूर, वो खिचड़ी पका रहे हैं। जब बनेगी तब आएंगे।"

एक घंटा बीता। दो घंटे बीते। अकबर खुद बीरबल के घर गए।

देखा — बीरबल एक छोटी सी आग के पास बैठे हैं। और चावल का पतीला आग से छह फुट ऊपर लटका है।

Birbal sits beside a small fire while a cooking pot hangs six feet above the flames on a rope, Emperor Akbar standing nearby looking confused

"यह क्या हो रहा है?" अकबर ने कहा। "पतीला आग के पास है ही नहीं। चावल कभी नहीं पकेंगे।"

"तो फिर," बीरबल ने धीरे से कहा, "महल की खिड़की का एक दीया — नदी में खड़े इंसान को कैसे गर्म कर सकता है?"

अकबर देर तक चुप रहे।

फिर उन्होंने उस गरीब आदमी को बुलाया — और सौ नहीं, दो सौ सोने के सिक्के दिए। ✦

Manoj Rajput

Manoj Rajput

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