यादें

अम्मा की रेसिपी बुक

1 मिनट
Read in English →
A worn green school exercise book with yellowed contact paper sits on a kitchen counter beside a stack of old bills and a small broken torch

अम्मा की रेसिपियाँ एक हरी कॉपी में थीं।

खास कॉपी नहीं — स्कूल वाली। पीछे पहाड़े छपे थे। उन्होंने कभी उस पर ट्रांसपेरेंट शीट चढ़ाई थी — जो किनारों से पीली पड़ गई थी। अंदर उनके हाथ की लिखावट थी — छोटी, थोड़ी तिरछी। जैसे जल्दी में लिखना सीखा हो।

कॉपी किचन की अलमारी के दूसरे खाने में रखी थी — पुराने बिलों के नीचे। और एक छोटी टॉर्च के नीचे जो सालों से बंद थी।

जब वो गईं, हमें वहीं मिली। दीदी लेकर आईं।

मैं काफी देर बाद खोल पाया।

A person sits at a kitchen table looking at an open worn green exercise book with small handwritten notes on its pages

अंदर रेसिपियाँ थीं — पर सही मायने में रेसिपियाँ नहीं। कोई माप नहीं। कोई वक्त नहीं। कोई तरीका नहीं। बस सामान की लिस्ट। और कभी-कभी एक नोट — धीमी आँच पर या जितना सोचो उससे ज़्यादा या — एक जगह बस एक लफ्ज़ — ध्यान से।

उनकी खीर बनाने की कोशिश की। लिस्ट पढ़ी। सब डाला। धीमी आँच पर पकाया। चखा।

उनकी खीर नहीं थी। करीब थी — पहले से ज़्यादा करीब — पर वैसी नहीं। जो चीज़ कम थी, अब समझ आती है — तीस साल की वो सुबहें जो उन्होंने उस चूल्हे पर खड़े होकर गुज़ारी थीं। इस पतीले की गर्मी। इस दूध को क्या चाहिए — यह सब जानते-जानते।

रेसिपी कभी कॉपी में थी नहीं।

कॉपी बस शुरुआत थी।

अब वो मेरी किचन में है। उसी दूसरे खाने में। उसी टॉर्च के नीचे जो अभी भी बंद है।

टॉर्च ठीक करवाने की कोशिश नहीं की। 

टिप्पणियाँ