ऊपर आसमान में, जहाँ चाँद हर रात पहरा देता था, एक छोटी सी तारा रहती थी।
उसका नाम था — तारा।
वो पूरे आसमान की सबसे छोटी तारा थी। इतनी छोटी कि बादल भी कभी-कभी उसे देखते ही नहीं थे। पर जब वो खुश होती थी, तो जुगनू जैसी चमकती थी।
हर शाम, जैसे ही सूरज पहाड़ों के पीछे सोने जाता था — तारा काँपने लगती थी।
"इतना अँधेरा है," वो धीरे से बुदबुदाती। "पता नहीं इस अँधेरे में क्या-क्या छुपा होगा।"
एक रात चाँद ने सुन लिया। वो मुस्कुराया।
"आ, तारा," चाँद ने कहा। "नीचे देख।"
तारा ने नीचे झाँका।
दूर एक गाँव में, एक छोटी सी बच्ची थी — अपनी दादी की गोद में लेटी हुई, आसमान की तरफ देख रही थी।
"वो बच्ची तुझे ढूँढ रही है," चाँद ने धीरे से कहा। "जब तक वो तुझे देख नहीं लेती, उसे नींद नहीं आती। तू उसकी पसंदीदा तारा है।"
तारा का काँपना रुक गया।
उसने एक गहरी साँस ली। सीना फुलाया। और जितनी ज़ोर से हो सका — चमकी।
नीचे वो छोटी बच्ची उठ बैठी और बोली — "दादी, देखो! वो रही मेरी तारा!"

उस रात के बाद तारा को कभी अँधेरे से डर नहीं लगा।
क्योंकि उसे पता चल गया था — अँधेरे में भी कोई न कोई उसकी रोशनी का इंतज़ार कर रहा होता है।
शुभ रात्रि, नन्हे दोस्त। ✦