पढ़ना सीखो मित्रता ज्ञान 🌐 Read in English
A bear standing over a man lying still on the forest floor, another man watching from high in a tree in the background

दो दोस्त और भालू

एक घना जंगल था। उस जंगल से होकर एक पगडंडी गुज़रती थी, दूर के गाँव तक जाने का यही सबसे छोटा रास्ता था। उसी पगडंडी पर दो दोस्त चल रहे थे। एक का नाम था रामू, दूसरे का नाम था श्यामू।

दोनों साथ बड़े हुए थे, एक ही गली में, एक ही स्कूल में। मेले से लौट रहे थे उस दिन, हाथों में मिठाई की पुड़िया लिए, बातें करते हुए, कभी गाँव की, कभी बचपन की शरारतों की। रास्ता लंबा था, पर साथ में कट रहा था। दोनों ने एक बार वादा भी किया था, बचपन में, कि जो भी हो जाए, मुसीबत में एक दूसरे को अकेला नहीं छोड़ेंगे।

सूरज ढलने लगा था, और जंगल का रास्ता सुनसान होता जा रहा था। अचानक झाड़ियों में सरसराहट हुई, तेज़, बहुत करीब से। दोनों रुक गए, साँस थम गई। सामने से एक बड़ा सा भालू निकल आया, धीरे धीरे, पर सीधा उन्हीं की तरफ बढ़ता हुआ।

रामू को पास ही एक पुराना पेड़ दिखा, मोटा तना, ऊँची डालियाँ। बिना कुछ सोचे, बिना श्यामू की तरफ देखे, वो उस पेड़ पर चढ़ गया, ऊपर, बहुत ऊपर, जहाँ से भालू पहुँच ही नहीं सकता था।

श्यामू वहीं रह गया, अकेला। न पेड़ पर चढ़ पाया, न भागने का वक्त बचा। भालू अब कुछ ही कदम दूर था, उसकी साँसें साफ सुनाई दे रही थीं।

तभी उसे कहीं सुनी हुई बात याद आई, भालू मरे हुए इंसान को नहीं छूता। और कुछ सूझा भी नहीं, तो श्यामू ज़मीन पर लेट गया, साँस रोक ली, आँखें बंद कर लीं, और बिल्कुल सीधा पड़ा रहा, जैसे जान ही न बची हो।

भालू पास आया। सूँघा, धीरे धीरे, पूरे शरीर के पास से गुज़रता हुआ। फिर श्यामू के कान के पास अपना मुँह ले गया, कुछ देर वहीं रुका रहा, जैसे कुछ जाँच रहा हो। श्यामू का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, पर वो हिला नहीं।

Bear Sniffing Man Acting Dead

आखिर में, जैसे भालू को यकीन हो गया कि यहाँ कुछ नहीं मिलेगा, वो वापस मुड़ा और जंगल में गायब हो गया।

काफी देर तक श्यामू हिला भी नहीं। पक्षियों की आवाज़ें फिर से सुनाई देने लगीं, और जब पूरा यकीन हो गया कि भालू सच में जा चुका है, तब जाकर वो उठा, धीरे धीरे, अभी भी काँपते हुए।

रामू पेड़ से नीचे उतरा, भागते हुए आया, "श्यामू, ठीक तो है ना तू? इतनी देर तक भालू ने कान में क्या कहा?"

श्यामू ने अपने कपड़े झाड़े, एक लंबी साँस ली, और सीधे रामू की आँखों में देखते हुए बोला, "उसने कहा, ऐसे दोस्त पर कभी भरोसा मत करना जो मुसीबत में तुझे अकेला छोड़कर भाग जाए।"

रामू कुछ नहीं बोल पाया। उसका चेहरा उतर गया। दोनों चुपचाप आगे बढ़ गए, मिठाई की पुड़िया अब भी हाथ में थी, पर रास्ता उस दिन के बाद पहले जैसा नहीं रहा।

इस कहानी पर मेरी सोच

 

आजकल दोस्ती भी अक्सर मतलब की रह गई है, और यह सिर्फ स्कूल या कॉलेज के दोस्तों तक सीमित नहीं, हर रिश्ते पर यह बात लागू होती है। जो बुरे वक्त में साथ नहीं देता, वो अच्छे वक्त में अपना बनकर लौट आए, ज़रूरी नहीं उसे वैसी ही जगह वापस देनी चाहिए। बेहतर है, अपना वक्त और भरोसा उन्हीं को दिया जाए, जो सच में आपका भला चाहते हैं, दिखावे में नहीं।

 

आपके साथ भी हुआ है कभी ऐसा, कोई दोस्त या रिश्ता जो सिर्फ ज़रूरत में याद आया, या कोई जो हर बुरे वक्त में साथ खड़ा रहा, बिना किसी वजह के?

 

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