पढ़ना सीखो ज्ञान साहस 🌐 Read in English
A warrior, a poet, and an engineer with his flying machine, looking toward a distant mountain

तीन योद्धा और सोमप्रभा

एक शहर था, बड़ा और समृद्ध। उस शहर में हरिस्वामी नाम का एक बड़ा व्यापारी रहता था। उसकी एक बेटी थी, सोमप्रभा, बहुत सुंदर, बहुत होशियार, कला और विद्या में भी माहिर, नाचना, गाना, शास्त्र पढ़ना, सब कुछ उसने सीखा था।

जब शादी की बात चली, तो सोमप्रभा ने अपने पिता से साफ कह दिया, "पिताजी, मैं किसी साधारण आदमी से शादी नहीं करना चाहती। जो भी हो, उसमें कुछ खास होना चाहिए, कोई हुनर, कोई बहादुरी, कुछ ऐसा जो उसे बाकी सबसे अलग बनाए। वरना शादी का क्या मतलब।"

यह बात एक राक्षस ने कहीं छिपकर सुन ली, जो उन्हीं जंगलों में रहता था, दूर की एक अंधेरी पहाड़ी पर। उसने मन में ठान लिया, "अगर वो इतनी चुनी हुई है, तो मैं ही उसे ले जाऊँगा। किसी इंसान की उससे शादी नहीं होने दूँगा।"

शहर में तीन जवान थे, तीनों सोमप्रभा से शादी करना चाहते थे, तीनों ने अपना अपना हुनर दिखाने की ठानी।

पहला था वीर सिंह, एक बहादुर योद्धा। एक दिन उसने सबके सामने अपनी तलवार से हवा में उड़ता एक सिक्का दो टुकड़ों में काट दिखाया, बिना एक पल गँवाए। दूसरा एक कवि था, शब्दों का जादूगर। उसने सोमप्रभा की तारीफ में ऐसी कविता सुनाई कि पूरी सभा तालियाँ बजाती रह गई, और खुद हरिस्वामी की आँखें भर आईं। तीसरा एक इंजीनियर था, उसने महीनों मेहनत करके खुद एक उड़ने वाला विमान बनाया था, लकड़ी और धातु से, और जब वो सबके सामने ज़मीन से उठकर हवा में तैरा, पूरा शहर देखता रह गया।

तीनों में किसी की कमी नहीं थी, और शहर में यही चर्चा थी, आखिर सोमप्रभा किसे चुनेगी।

शादी की तैयारी होने लगी। मंडप सजाया गया, रिश्तेदार दूर दूर से आए, ढोल बजने लगे। पर ठीक उसी दिन, जब सब कुछ तैयार था, आसमान अचानक काला पड़ गया। एक ज़ोरदार गर्जना हुई, और वो राक्षस, विशाल, डरावना, आँखों में आग लिए, सीधा मंडप के बीच आ खड़ा हुआ।

लोग चीखते हुए इधर उधर भागे। राक्षस ने सोमप्रभा को उठाया, जो डर के मारे चीख भी नहीं पाई, और पलक झपकते ही आसमान में गायब हो गया।

पूरा घर रो पड़ा। हरिस्वामी ज़मीन पर बैठ गए, कुछ समझ नहीं आया, कहाँ जाएँ, किससे मदद माँगें।

तभी तीनों जवान आगे आए, चेहरों पर डर नहीं, बस ठान लेने का भाव।

कवि ने कहा, "मुझे किताबों से पता है, ऐसे राक्षस अक्सर किस तरफ के पहाड़ों में रहते हैं। मैं रास्ता बता सकता हूँ, बशर्ते मुझे थोड़ा वक्त मिले पुराने ग्रंथ खँगालने का।" इंजीनियर ने कहा, "मेरा विमान हमें वहाँ तक पहुँचा सकता है, चाहे कितनी भी दूर क्यों न हो, बस दिशा बता दो।" वीर सिंह ने बस इतना कहा, "और वहाँ पहुँचकर, राक्षस से लड़ना, वो काम मेरा है, चाहे कुछ भी हो जाए।"

तीनों विमान में सवार हुए। रात भर उड़ते रहे, कवि लगातार पुराने संकेतों से रास्ता जोड़ता रहा, तारों की दिशा देखकर, पुरानी कहानियों को याद करके। सुबह होते होते, दूर एक काली, बंजर पहाड़ी दिखाई दी, जहाँ न कोई पंछी था, न कोई हरियाली।

गुफा के अंदर, सोमप्रभा एक कोने में बैठी थी, डरी हुई, पर हिम्मत बनाए हुए, मन ही मन खुद को समझा रही थी कि कोई तो आएगा।

वीर सिंह अकेला गुफा के अंदर गया। राक्षस बहुत बड़ा था, बहुत ताकतवर, उसकी दहाड़ से पूरी पहाड़ी काँप उठी।

A warrior facing a demon in a cave, a princess watching from the corner

लड़ाई देर तक चली, तलवार और पंजों की टक्कर गूँजती रही, धूल और चिंगारियाँ उड़ती रहीं। कई बार लगा वीर सिंह हार जाएगा, पर वो डटा रहा। आखिर में, एक सही वार में, उसकी तलवार निशाने पर लगी, और राक्षस वहीं ढेर हो गया, हमेशा के लिए।

सोमप्रभा को आज़ाद कराकर तीनों वापस लौटे। पूरे शहर में जश्न मनाया गया, दीये जलाए गए, मिठाइयाँ बँटीं।

पर अब एक सवाल उठा, तीनों में से सोमप्रभा से शादी कौन करे? कवि ने रास्ता बताया था, बिना उसके वो कभी वहाँ तक पहुँच ही नहीं पाते। इंजीनियर ने वहाँ तक पहुँचाया था, उसके विमान के बिना रास्ता जानकर भी कोई फायदा नहीं होता। और वीर सिंह ने असल लड़ाई लड़ी थी, अपनी जान जोखिम में डालकर।

तीनों का योगदान था, तीनों के बिना सोमप्रभा वापस नहीं आ पाती। तो हक किसका बनता है?

अगर यह फैसला आपके हाथ में होता, आप किसे चुनते, और क्यों?

इस कहानी पर मेरी सोच -  

सच कहूँ तो यह चुनना आसान नहीं है, और मुझे लगता है असली फैसला सोमप्रभा का ही होना चाहिए, इतना कुछ होने के बाद, वो खुद तय करे कि कौन उसके लिए सही है। पर अगर मुझे ही चुनना हो, तो मैं वीर सिंह को चुनूँगा, क्योंकि बाकी दोनों ने तो राक्षस तक पहुँचने में मदद की, पर असल में अपनी जान जोखिम में सिर्फ वीर सिंह ने डाली।

आप मुझसे सहमत हैं, या आपका चुनाव कुछ और होता?

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