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ब्राह्मण और साँप

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ब्राह्मण और साँप पंचतंत्र की एक कहानी है — दुनिया के सबसे पुराने कथा-संग्रहों में से एक, जो दो हज़ार साल से भी पहले भारत में लिखी गई थी। यह कहानी है आभार, लालच और भरोसे के टूटने के नतीजों के बारे में।

एक गाँव के पास एक ब्राह्मण रहता था।

ज़मीन थी — पर सूखी। मेहनत करता था — पर फसल कभी पूरी नहीं होती थी।

एक सुबह खेत में काम करते हुए उसे ज़मीन में एक बिल मिला। उसमें एक साँप था।

उसने साँप को मारा नहीं। देर तक देखता रहा।

बचपन में एक बुज़ुर्ग ने बताया था — जिस खेत के पास साँप रहे वो खेत फलता-फूलता है। उसे खाना खिलाओ, उसका सम्मान करो — ज़मीन देगी।

उस शाम ब्राह्मण एक कटोरा दूध लेकर आया। बिल के पास रखा। घर चला गया।

अगली सुबह — दूध की जगह एक सोने का सिक्का था।

Brahmin Prays at the Cobras Hole — Evening Ritual

यह सिलसिला चलता रहा। हर शाम दूध। हर सुबह सोने का सिक्का। ब्राह्मण की ज़िंदगी धीरे-धीरे बेहतर होने लगी। उसने किसी को नहीं बताया। बस आता, दूध रखता, एक छोटी-सी प्रार्थना करता और चला जाता।

एक दिन ब्राह्मण को दूसरे गाँव जाना पड़ा।

उसने अपने बेटे से कहा — जब तक मैं न आऊँ, हर शाम बिल पर दूध रख आना।

बेटा गया। दूध रखा। अगली सुबह सिक्का मिला।

उसने सिक्के को देर तक देखा।

अगर एक बार जाने से एक सिक्का मिलता है — तो अगर साँप को मारकर सारे सिक्के एक साथ ले लें? ज़रूर अंदर ढेर सारा सोना होगा।

अगले दिन वो लाठी लेकर आया।

साँप ने उसे बिल तक पहुँचने से पहले ही डस लिया।

बेटे की उसी दोपहर मौत हो गई।

ब्राह्मण लौटा। सुना।

वो उस शाम बिल पर आया। गुस्से से नहीं। बस दूध का कटोरा लेकर।

रखा। बैठा रहा। साँप बाहर नहीं आया।

देर बाद अंदर से आवाज़ आई।

"तुम वापस आए," साँप ने कहा। "पर अब वो बात नहीं रही। तुम्हारे बेटे ने लालच में मुझ पर वार किया। मैंने बचाव किया। जो हमारे बीच था — वो भरोसा — टूट गया। यह आखिरी सिक्का लो। अब मत आना।"

बिल के मुहाने पर एक सोने का सिक्का आया।

ब्राह्मण ने उठाया। घर चला गया।

फिर कभी नहीं आया।

लालच सिर्फ लालची को नहीं डुबोता।
उसके आसपास के सबको डुबोता है।

और कुछ चीज़ें एक बार टूट जाएँ — तो वापस नहीं जुड़तीं।

Manoj Rajput

Manoj Rajput

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