जल्द आ रहा है!
अभी नहीं — पर जल्द।
बचपन डायरीज़ अभी एक एडिटोरियल प्लेटफॉर्म है। हर कहानी हम खुद लिखते और चुनते हैं। दरवाज़ा खोलने से पहले आवाज़ सही करनी है।
हम कम्युनिटी राइटर्स के लिए खुलने का इरादा रखते हैं। बस आज नहीं।
हम क्या ढूँढेंगे
भारत में बड़े होने की कहानियाँ — कोई भी दौर, कोई भी इलाका। निजी यादें, लोककथाएँ, परिवार की कहानियाँ। ईमानदारी से लिखी हुई।
वो कहानी जो पढ़कर कोई कहे — हाँ, यह तो मेरे साथ भी हुआ था।
हम वो नहीं लेंगे जो बचपन या भारत से जुड़ा न हो, जो प्रमोशनल हो, या जो किसी को नीचा दिखाए।
हिंदी में लिखी कहानियाँ भी आएंगी। मौलिक हिंदी लेखन — अनुवाद नहीं।
लंबाई — 500 से 2000 शब्द।
जुड़े रहें
कहानियाँ सीधे आपके इनबॉक्स में
हर पड़ाव की कहानियाँ — कभी-कभी, बिना शोर के।
कोई स्पैम नहीं। जब चाहें हटा सकते हैं।